व्यक्तिगत चरित्र से ही राष्ट्रीय चरित्र जन्म लेते हैं।
नेपाल की जनता ने भ्रष्टाचार की दुहाई देकर अपने ही देश की सत्ता को पलट दिया है। अब वहां से जो चित्र और चलचित्र निकल कर आ रहे हैं उन्होंने चरित्र पर बात करने को मजबूर किया है।
यदि यह आंदोलन भ्रष्टाचार एवं भ्रष्टाचारी नेतृत्व के विरोध में है तो ये होटल, शो रूम और अपने ही लोगों से लूटपाट किसलिए है? क्या उनका यह चरित्र ठीक है ? क्या यही लूटपाट करने वाले लोग “नेपाली आमा” को एक उज्जवल भविष्य की ओर ले जाएंगे ?
नेपाली आमा की जय जयकार तभी होगी जब यह जेन जी अनुशासित होगी, इनके अपने नैतिक मूल्य होंगे, जो अपने राष्ट्र को अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर अपने लोगों के लिए काम करेंगे।
हालांकि वहां एक बड़ा वर्ग राष्ट्रीय चरित्र से ओतप्रोत है जो अभी आगे आना बाकी है। यह लूटपाट करने वाले बहुत थोड़े हैं जो विदेशी एजेंसियों के हाथों खेल रहे हैं।
ऐसे गिनती के लोग भारत में भी हैं जिनके व्यक्तिगत चरित्र बहुत हल्के हैं। वे आपदा में व्यक्तिगत अवसर तलाशते हैं और विदेशी एजेंसियों के हाथों खेलते हैं। यह लोग एक लंबे समय से मौके की तलाश में हैं। भारत की तरह ही नेपाल भी एक महान ओल्ड सिविलाइजेशन है इनको मिटाना इतना आसान नहीं है। यह आने वाले समय में सुनहरा भविष्य लिखेंगे।
लेखक: उमाशंकर शर्मा